Poem
कविता - "खोज"
लेखिका - स्वप्ना बनर्जी
मन चली उड़ी - उड़ी साजन के संग
इधर - उधर नजर पड़ी कहीं - कहीं ।।
बनके देखी दुल्हन , करके देखी सत्संग
राम - राम का भेष बनाया नकली ।।
फिर से फुदक - फुदक मन लेकर चालू खोज सु- संग
कौन सही , करती रही देखा - दारी ।।
अबकी बार ले लूंगी डुबकी सच्चाई - संग
राम - राम पुरा किचड़ बदन में --------।।
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